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शक्ति संवर्धन का बहुत बड़ी उपाय है अखण्ड जप- सम्पत कलंत्री
जिला गायत्री परिवार मधुबनी ने अपने 7 वाॅ स्थापना दिवस 23 नवम्बर को गायत्री शक्तिपीठ लहेरियागंज मधुबनी में 12 घंटे गायत्री महामंत्र अखण्ड जप से प्रारंभ कर दीप महायज्ञ के साथ संपन्न किया। इस दौरान गायत्री परिवार के कई कार्यकर्ताओं ने अपने साहस को दिखाते हुए इतनी ठंढ में भी दूर दूर से आकर गायत्री महामंत्र का जप किया। यह जप का संकल्प गायत्री शक्तिपीठ परिव्राजक सुबोध शास्त्री के माध्यम से प्रातः कालीन 05:20 में किया गया था। इस बीच जिला समन्वयक श्री संपत कुमार कलंत्री के मार्गदर्शन में,गायत्री परिवार सदस्य श्री देवेंद्र प्रसाद (मुन्ना जी) एवं मुख्य ट्रस्टी श्री बिमल कुमार सिंह की अध्यक्षता में गोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें ट्रस्ट पुनर्गठन , ट्रस्ट विस्तार एवं मंदिर के उपर गेस्ट रुम बनाने का विचार विमर्श किया गया। इस गोष्ठी में जयनगर के तमाम ट्रस्टी एवं मधुबनी जिले के त...
भक्तों को समस्त रोग-शोक से मुक्ति प्रदान करती है माँ कुष्मांडा- सुबोध शास्त्री
जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब इन्हीं देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। अतः ये ही सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं। इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है। वहाँ निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवल इन्हीं में है। इनके शरीर की कांति और प्रभा भी सूर्य के समान ही दैदीप्यमान हैं। इनके तेज और प्रकाश से दसों दिशाएँ प्रकाशित हो रही हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में अवस्थित तेज इन्हीं की छाया है। माँ की आठ भुजाएँ हैं। अतः ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात हैं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। इनका वाहन सिंह है। गायत्री शक्तिपीठ परिव्राजक सुबोध शास्त्री के अनुसार माँ कूष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है। माँ कूष्माण्डा अत्यल्प सेवा और भक्ति से प्रसन्न होने वाली हैं। यदि मनुष्य सच्चे हृदय से इनका शरणागत बन जाए तो फिर उसे अत्यन्त सुगमता से परम पद की प्राप्ति हो सकती है। ...
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